ईश्वर पर अटूट विश्वास ही सुख, आनंद व मोक्ष का आधार- श्री विजयानंद गिरी जी महाराज
रानू पाण्डेय
खानपुर। मानव जीवन को दिग्भ्रमित होने से बचाने व संस्कार, सभ्यता तथा सनातन संस्कृति से जोड़ने का क्रम तथा भगवान की प्राप्ति का माध्यम ही सन्तो की दिनचर्या है जो हमेशा मानव कल्याणकारी युक्तियों से संसार को अभिसिंचित करते हैं। यही अभिसिंचन क्षेत्र के परसनी गाँव स्थित ठाकुर जी महराज के प्रांगण में इस वक्त जारी है। इसके प्रवाहक ऋषिकेश से पधारे संत श्री विजयानंद गिरी जी महाराज जी हैं। यह कथा विंध्याचल ग्रुप एंड कंपनी के डायरेक्टर समाजसेवी मनोज सिंह द्वारा कराई जा रही है। कथा का छटवा दिवस रहा जिसमे आसपास के श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में उपस्थित होकर भगवत सलिला में आनंद की डुबकी लगाई और संत श्री द्वारा बताए गए भगवत प्राप्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। ऋषिकेश से सैदपुर पधारे ओजस्वी प्रखर प्रवचनकर्ता श्री विजयानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि, मानव रूपी शरीर व संसार नित क्षण बदल रहा है जो मिथ्या भी है। लेकिन जगत पिता परमात्मा कभी नही बदलते इसलिए ईश्वर पर ही विश्वास करना है अन्य किसी पर आसक्ति दुख का कारण है। लेकिन ईश्वर पर अटूट विश्वास ही सुख, आनंद व मोक्ष का आधार है। उन्होंने कहा कि जब ईश्वर मानवों के प्रेम से सराबोर हो जाते हैं तब उन पर कृपा करने सन्तो को माध्यम बनाकर भगवत कथा का प्रसाद वितरण करते हैं जिससे मानव जीवन का उद्धार होता है। भगवान की भक्ति व प्राप्ति का बखान करते हुए संत श्री ने कहा कि ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं और हर जीव का कल्याण करते हैं। वह ईश्वर कदापि नही हो सकता जो कहीं है और कहीं नही है, जो किसी पर कृपा करता है और किसी पर नही करता,जबकि ईश्वर तो हर जगह है और सब पर कृपा करता है। भगवान से बस सम्बंध स्थापित करने की ही जरूरत है, जब मानव भगवान से संबन्ध स्थापित कर लेता है और अपने आप को ईश्वर की ही संतान कहता व समझता है तो ईश्वर उसका संरक्षण करना शुरू कर देते हैं और यही संबन्ध हर मानव के कल्याण का कारण बनता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि, सांसारिक वस्तुओं पर मानव का हक नही हो सकता लेकिन ईश्वर पर मानव का हक जन्म सिद्ध अधिकार है और यही अधिकार ईश्वर को अच्छा लगता है। ईश्वर ही मेरे हैं, यही कहने मात्र से ही ईश्वर प्राप्त हो जाते हैं और मानव निहाल हो जाता है। उनमे विशेष यह भी है कि, कथा में किसी भी तरह का चढ़ावा या भेंट स्वीकार नही हो रहा है। दिखावा पंथी से भिन्न है स्वामी विजयानंद गिरी जी महाराज की कथा, उनका स्पष्ठ आदेश है कि कोई भी व्यक्ति न तो उनका चरण छुएगा, न ही कोई चढ़ावा चढ़ाएगा और न ही महराज जी की फ़ोटो खींचेगा कुल मिलाकर तामझाम से इतर सादगी पूर्ण भाव सरिता का प्रवाह इस वक्त परसनी में हो रहा है जिसके मुख्य आयोजक वरिष्ठ समाजसेवी मनोज सिंह है।




