राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

खानपुर।क्षेत्र के ईशोपुर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मंगलवार की शाम राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों को प्रकृति आधारित जीवनशैली और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों के महत्व से अवगत कराया।विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा विश्व की सबसे पुरानी स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ती है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. समीक्षा बरनवाल ने कहा कि नेचुरोपैथी का मुख्य सिद्धांत शरीर की अपनी उपचार क्षमता को सक्रिय करना है। इसके लिए आहार शुद्धि, नियमित व्यायाम, उपवास, जल चिकित्सा, वनस्पति चिकित्सा, होम्योपैथी और डिटॉक्स जैसे उपाय अपनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव शरीर प्रकृति के पांच तत्वों मिट्टी,जल,वायु,अग्नि और आकाश से बना है और इन्हीं पंचमहाभूतों के माध्यम से शरीर की शुद्धि व आरोग्यता संभव है।प्राकृतिक चिकित्सा बिना किसी दुष्प्रभाव के स्वास्थ्य संरक्षण और रोग निवारण की एक प्रभावी पद्धति है। इसमें स्वास्थ्य, रोग और उपचार से जुड़े सिद्धांत प्रकृति के नियमों पर आधारित होते हैं। शरीर में स्वयं रोगों से बचने व अस्वस्थ हो जाने पर पुनः स्वस्थ होने की क्षमता विद्यमान है। वहीं गोरखा में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. संतप्रताप ने कहा कि मानव शरीर में स्वयं को स्वस्थ करने की अद्भुत प्राकृतिक शक्ति मौजूद है। इसलिए संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, प्राकृतिक तत्वों का उचित उपयोग और मानसिक शांति जैसे उपायों को अपनाकर बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा केवल इलाज नहीं, बल्कि एक समग्र जीवनशैली है जो व्यक्ति को प्रकृति के अधिक निकट ले जाती है और उसे स्वस्थ व संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।