गहमर क्षेत्र में बाइक चोरों का आतंक, पुलिस की निष्क्रियता से बढ़ रहा अपराधियों का मनोबल
सेवराई। गहमर थाना क्षेत्र के सतरामगंज सेवराई बाज़ार में इन दिनों बाइक चोरों का गिरोह पूरी तरह सक्रिय हो गया है। एक के बाद एक हो रही चोरी की घटनाएँ न केवल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि लोगों में भय और आक्रोश भी तेजी से बढ़ रहा है। पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं, जबकि चोर लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं।
अभी शुक्रवार की देर शाम रेलवे क्रॉसिंग के समीप बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर खड़ी उमाशंकर श्रीवास्तव की बाइक को चोरी होने के घटना के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी थी, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया।
इसी बीच चोरो ने पुलिस को चुनौती देते हुए रविवार की रात भदौरा स्थित एक मैरेज हाल में बारात में शामिल होने गए बहादुरपुर निवासी शिवमंगल सिंह की बाइक यूपी 65 बीएफ 6255 मैरेज हाल के पास से ही चोरी हो गई। यह जगह पुलिस चौकी से महज़ पाँच सौ मीटर की दूरी पर है, बावजूद इसके चोर वारदात को बेखौफ अंजाम देकर फरार हो गए। पीड़ित शिवमंगल सिंह ने तत्काल घटना की लिखित सूचना पुलिस को दी, लेकिन सोमवार शाम तक बाइक का कोई पता नहीं चल सका।
स्थानीय लोगों में बढ़ता रोष, पुलिस पर लापरवाही के आरोप
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सतरामगंज, सेवराई और आसपास के इलाकों से कई बाइकें चोरी हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी मामले का खुलासा नहीं कर सकी। लगातार विफलता से चोरों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी चोरी की घटनाओं को अंजाम देने से नहीं डर रहे।
जांच सिर्फ कागज़ों में, कार्रवाई नदारद
पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर रही है। न तो गश्त बढ़ाई गई है और न ही किसी संदिग्ध की धरपकड़। आम जनता का कहना है कि यदि पुलिस सक्रिय होती, तो गिरोह का अब तक पर्दाफाश हो चुका होता।
निरंतर हो रही चोरी की घटनाओं से क्षुब्ध स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से क्षेत्र में रात्री गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी फुटेज की व्यापक जांच कराने और सक्रिय चोरी गिरोह को जल्द पकड़ने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने कठोर कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
क्षेत्र में बढ़ते बाइक चोरी के मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब देखना यह है कि पुलिस इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से कदम उठाती है।




