नगर पंचायत सैदपुर द्वारा लाखो रुपय के कूड़ा निस्तारण केंद्र बना शो पीस
गगन बरनवाल/रानू पाण्डेय
सैदपुर : क्षेत्र के सैदपुर -भीमापर रोड स्थित इस्माइलपुर गाँव मे बनाए गए नगर पंचायत सैदपुर द्वारा लाखो रुपय के कूड़ा निस्तारण केंद्र शो पीस बनकर रह गया है। उक्त केंद्र का मानक के विपरीत बनाए गए बाउंड्रीवाल कुछ ही वर्षो मे टूट कर गिर गए है। जिससे केंद्र मे रखा गए कूड़ा कचरे से उठ रही बदबू व जलाने के बाद निकलने वाले धुए से लोगो क़ो परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन नगर पंचायत सहित जिम्मेदार अधिकारी आँखे मुंदे पड़े है।
बता दे की इस्माइलपुर गाँव मे बनाए गए नगर पंचायत सैदपुर द्वारा लाखो रुपय के कूड़ा निस्तारण केंद्र मे रोजाना नगर पंचायत द्वारा नगर के लगभग दस टन कूड़ा कचरा क़ो उक्त केंद्र मे पहुंचाया जाता है। उक्त कूड़े कचरे की अत्यधिक मात्रा हो जाने से केंद्र की मानक विहीन बाउंड्री कुछ दूर टूट कर गिर गई। जिससे उसमे रखा कूड़ा अगल बगल खेतो मे फ़ैल गया। वही केंद्र की दिवाल टूटने की वजह से खुले मे पड़े कूड़े से संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भीं बढ़ गयी है। जबकी उक्त रोड पर क्षेत्र के कई बड़े स्कूल सहित महाविद्यालय भीं संचालित होते है। जिसमे पढ़ने के लिए रोजाना हजारों बच्चे प्रतिदिन उक्त रोड से हो अपने विद्यालय आते जाते है। जिससे उन बच्चों के स्वास्थ्य पर भीं इसका भयानक असर पड़ रहा है। वहीं रोजाना आने जाने वाले राहगीरों को भीं कूड़े से उठ रहे गंदी बदबूओ का सामना करना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। नगर को स्वच्छ व साफ सुथरा बनाने के लिए नगर पंचायत के तरफ से करीब लाखों रुपये की लागत से कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया गया है। वह वर्तमान समय में शो पीस बनकर रह गया है। इधर उक्त रोड पर संचालित होने वाले जीबी इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक सौम्य प्रकाश बरनवाल, हीरालाल सिंह महाविद्यालय के संचालक वीरेंद्र यादव,सुनील यादव, प्रधानाचार्य एके बरतरिया का कहना है कि सैदपुर बहरियाबाद मार्ग पर बने इस कूड़ा निस्तारण केंद्र की वजह से सैकड़ों बच्चों सहित राहगीर को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा हैं। उक्त कूड़ा क़ो नगरपंचायत कर्मी द्वारा जलाने के बाद उसमे से निकल रहे दुर्गंधयुक्त धुएं लोगों के घरों व आने जाने वाले लोगो के स्वास के जरिये शरीर के अन्दर प्रवेश करती है। जिससे बीमारियां फैलने का अंदेशा बना हुआ है। लेकिन नगर पंचायत से ले जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे पड़े हुए हैं।




