साइबेरियन पक्षियों की अठखेलियां श्रद्धालुओं के लिए बनी आकर्षण का केंद्र
रानू पाण्डेय
खानपुर।सैदपुर विकास खंड क्षेत्र के बने गंगा के किनारे बूढ़ेनाथ घाट,भीम घाट व आदित्य विरला घाट पर इस समय गंगा की लहरों पर वितरण करते साइबेरियन पक्षी श्रद्धालुओं को खूब लुभा रहे हैं। ये पक्षी हर साल नवंबर के शुरुवाती हफ्तों में सैदपुर के अन्य घाटों पर लगभग पांच महीने तक रहते हैं। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ये वापस अपने मूल निवास रूस के साइबेरिया के लिए लौट जाते हैं। जनवरी माह के शुरुवात में ये पक्षी प्रयागराज के संगम तट गंगा यमुना के ढाब की ओर चले जाते हैं। इन पक्षियों के आने पर शिकरी भी घात लगाए रहते हैं। इन पक्षियों के आने पर शिकरी भी घात लगाए रहते हैं। देर शाम अपने बसेरे में जाते वक्त शिकारी उन पर हमला करने से नहीं चूकते। इन्हें मैदानी भाग की जलवायु काफी पसंद हैं। यही कारण हैं कि यह कई किमी तक गंगा के किनारे को अपना बसेरा बनाए हुए हैं दूर देश से आए इन मेहमानों पक्षियों की खातिरदारी में यहां के नागरिक कोई कर कसर नहीं छोड़ते। सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ पेड़ पौधों के झुरमुटो से निकल कर आए पक्षी घाटों पर अठखेलियां करने लगते हैं।
तय रास्ते से सफर करते हैं प्रवासी पक्षी, ब्रेड-नमकीन न खिलाएं
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प्रोफेसर हृदयकांत पाण्डेय बताते हैं कि सात समुंदर पार से परिंदे जिस रास्ते से आते हैं, उसी को जाने के लिए चुनते हैं। ठहरने का स्थान पहले ही तय होता है, जहां वो हर साल रुकते हैं। गंगा स्वच्छ हुई हैं। लिहाजा, प्रवासी पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सैलानी कई बार पक्षियों को ब्रेड या नमकीन खिलाते हैं, जो उनके लिए हानिकारक होते हैं।




