उत्तर भारत में स्थित ब्रज क्षेत्र(मथुरा–वृंदावन–गोवर्धन– बरसाना–नंदगांव)
घुमक्कड़ी धीरज मिश्र
उत्तर भारत में स्थित ब्रज क्षेत्र(मथुरा–वृंदावन–गोवर्धन– बरसाना–नंदगांव) को श्रीकृष्ण की लीलाभूमि कहा जाता है। हम छह सदस्यों के समूह ने इसी पावन ब्रज क्षेत्र का आनंद लेना तय किया।
हालांकि हमारी यात्रा का क्रम यह नहीं रहा लेकिन श्री कृष्ण के जीवनकाल के क्रम के हिसाब से चलें तो मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर स्थित है जहां कारागार में माता देवकी जी ने श्री कृष्ण को जन्म दिया था। जन्म के तुरंत बाद वासुदेव जी उन्हें यमुना पार गोकुल ले गए। गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया ने श्री कृष्ण का पालन–पोषण किया पर मामा कंस से खतरे को देखते हुए नंद जी समस्त कुटुंब सहित वृन्दावन के पास नंदगांव चले गए और नंदगांव, वृन्दावन, गोवर्धन पर्वत और आसपास की भूमि श्री कृष्ण की लीला स्थली बन गयी।
यहीं से हमने अपनी दर्शन यात्रा प्रारंभ की।"वृंदा" (तुलसी) और "वन" (वन/उपवन) – इसका अर्थ है तुलसी से भरा वन। इसी वन में श्रीकृष्ण ने किशोरावस्था व्यतीत की.... यहां उन्होंने रास किया और गोपियों संग लीलाएँ की। यहीं स्थित है विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी जी का मंदिर। यहां की मूर्ति में राधा कृष्ण की एकीकृत छवि है और ऐसा मैंने पढ़ा है कि ये जो एकलरूप काली मूर्ति राधा-कृष्ण की है ये तीन जगह से बाँकी है। ‘बाॅंका शब्द का अर्थ होता है वक्र या मुड़ा हुआ ।बिहारी का अर्थ होता है हमेशा श्रेष्ठतम आनंद में रहने वाला। इसलिये त्रिभंगी मुद्रा में खड़े कृष्ण यहां कहलाते हैं बांके बिहारी।
वृन्दावन का एक आकर्षण इस्कॉन मंदिर भी है जहां की शाम की आरती में राधे कृष्णा, राधे कृष्णा के अद्भुत भजन में हम लोग शामिल हुए और डेढ़ घंटे के इस आनंद के अनुभूति को शब्दों में लिख पाना संभव नहीं है।
वृन्दावन में शाम का आनंद प्रेम मन्दिर में मिलता हैं जहां कृपालु महाराज के ट्रस्ट द्वारा निर्मित इस मन्दिर का सौंदर्य ऐसा है कि आपको आने का मन नही करेगा।
ब्रज क्षेत्र का अगला भाग है
गोवर्धन। जब इन्द्र देव की अतिवृष्टि से गोकुलवासी भयभीत हुए, तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की सहायता से सभी को वर्षा से बचाया और वर्तमान में यहाँ गोवर्धन परिक्रमा का महत्व है। हमने भी वाहन से यह परिक्रमा की।
गोवर्धन पर्वत भूगर्भीय दृष्टि से बहुत प्राचीन है। यह अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। जो दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रेणियों में से एक है,यह राजस्थान से लेकर हरियाणा, दिल्ली, फिर उत्तर प्रदेश (मथुरा क्षेत्र) तक फैली हुई थी। समय के साथ इसका क्षरण हुआ, और आज गोवर्धन उसी का अवशेष माना जाता है।
यात्रा के दूसरे दिन हम सभी मथुरा में थे जहां प्रमुख आकर्षण है श्री कृष्ण जन्मभूमि, विश्राम घाट और श्री द्वारिकाधीश जी का मन्दिर। यमुना जी बाढ़ पर थी पर मन्दिरों में दर्शन बाधित नहीं था। ब्रज क्षेत्र में मैंने मन्दिरों में लोगों को राधे कृष्ण की बलैया लेते देखा जैसे हम अपने बच्चों के बाल सौन्दर्य पर आनन्दित होते हैं।
जहां द्वारिका (गुजरात) में मैंने लोगों को श्री कृष्ण से राजा के रूप व्यवहार करते देखा वहीं ब्रज क्षेत्र में कृष्ण उनके लिए लाल हैं, कन्हैया हैं। इसलिये वहां की जयकार है
हाथी घोड़ा पालकी
जय कन्हैया लाल की।
बोलो वृन्दावन बिहारी लाल की जय



