नई तकनीक से 90 फीसदी बछिया पैदा होंगी
रानू पाण्डेय
छुट्टा पशुओं की समस्या होगी कम, बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन, 100 रुपये में सुविधा मिलेगी
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खानपुर।आधुनिक तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान कराने पर गाय, भैंस से 90 प्रतिशत तक बछिया या पड़िया जन्म लेती हैं। इससे न सिर्फ दूध उत्पादन तीन गुना तक बढ़ेगा, बल्कि खेत-खलिहानों में नुकसान पहुंचाने वाले छोटे पशुओं की संख्या भी नियंत्रित होगी।देश में छुट्टा पशुओं की बढ़ती समस्या और दुग्ध उत्पादन में कमी को देखते हुए भारत सरकार के पशु प्रजनन एवं अनुवांशिकी विभाग सेक्स्ड शार्टेड सीमन तकनीक को बढ़ावा दे रहा है।विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा वर्षों के शोध के बाद विकसित इस तकनीक में एक्स और वाई शुक्राणुओं को अलग कर मादा उत्पत्ति वाले एक्स शुक्राणुओं का उपयोग किया जाता है।इससे नर बछड़े जिनकी उपयोगिता वर्तमान समय में लगभग समाप्त हो चुकी है उनके जन्म की संभावना केवल 10% रह जाती है। सैदपुर स्थित राजकीय उप चिकित्सक अधिकारी डॉ. अल्प नारायण सिंह ने बताया कि सेक्स्ड शार्टेड सीमन से न सिर्फ मादा संतति बढ़ेगी बल्कि पशुपालकों की आय में सीधी बढ़ोतरी होगी।इसकी कीमत भी अब काफी कम कर दी गई है, जिससे हर किसान इसका लाभ उठा सकता है। सरकारी सब्सिडी के चलते यह सीमन राजकीय पशु चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों पर मात्र 100 रुपये में उपलब्ध है। पहले इसकी कीमत 300-400 रुपये तक थी।
1=दुग्ध उत्पादन में तीन गुना तक बढ़ोतरी: महिला पशुओं यानी बछिया और पड़िया की संख्या बढ़ने से भविष्य में दूध देने वाले पशुओं की संख्या भी बढ़ेगी। इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में इससे दूध उत्पादन में तीन गुना तक बढ़ोतरी संभव है।
2=छुट्टा पशुओं की समस्या होगी नियंत्रित खेती में अब बैलों का उपयोग लगभग समाप्त हो गया है। ऐसे में नर पशु छुट्टा होकर खेत-खलिहानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। 90 प्रतिशत मादा संतति पैदा होने से इनकी संख्या नियंत्रण में आएगी और किसानों को राहत मिलेगी।
3=क्या है सेक्स्ड शार्टेड सीमन ? यह विशेष प्रकार का प्रोसेस्ड सीमन है, जिसमें मादा उत्पत्ति वाले एक्स-शुक्राणुओं को अलग कर संरक्षित किया जाता है। पारंपरिक सीमन में एक्स और वाई शुक्राणु मिश्रित रहते हैं, जबकि इस तकनीक में वाई यानी नर संतति वाले शुक्राणुओं को अलग कर दिया जाता है। इससे बछिया पैदा होने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।
ये होंगे लाभ
किसानों की आय में होगी तेजी से वृद्धि।
अधिक मादा पशुओं का मतलब अधिक दूध।
दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की कमाई में इजाफा।
सरकार का 'किसानों की आय दोगुनी' लक्ष्य पाने में मदद।
छुट्टा पशुओं से बचेंगे खेत, फसल बर्बादी घटेगी।




