गर्मी की मार से दुधारू पशु बेहाल, पशुपालकों को आर्थिक नुकसान का डर

गर्मी की मार से दुधारू पशु बेहाल, पशुपालकों को आर्थिक नुकसान का डर

रानू पाण्डेय की रिपोर्ट

खानपुर: जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बनी उमस का असर अब दुधारू पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है। हीट स्ट्रेस के कारण पशुओं की सेहत प्रभावित हो रही है, जिससे दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा रही है। इससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।पशुपालकों का कहना है कि तेज धूप और उमस के चलते पशु दिनभर हांफते रहते हैं। अधिक तापमान के कारण वे सामान्य से कम चारा खा रहे हैं और पानी की कमी होने पर उनकी शारीरिक क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ रहा है।सौना के पशु चिकित्सक डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि हीट स्ट्रेस से पशुओं की हृदय गति और रक्तचाप बढ़ जाता है तथा उनकी प्रजनन क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सलाह दी कि पशुओं को ठंडी व छायादार जगह पर रखें, पशुशाला में पर्याप्त हवा का इंतजाम हो तथा समय-समय पर स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक पशुओं को चराने के लिए बाहर न ले जाएं, क्योंकि इस दौरान तापमान सबसे अधिक रहता है। मानसून से पहले गलघोंटू रोग का टीकाकरण और कृमिनाशक दवा देना भी जरूरी है।डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि गंगा और गोमती नदी के बाढ़ संभावित गांवों में पशुपालन विभाग की ओर से टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि बरसात के दौरान संक्रामक बीमारियों से पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि यदि इस मौसम में पशुओं की समुचित देखभाल नहीं की गई तो दूध उत्पादन में और गिरावट आ सकती है, जिससे पशुपालकों की आय के साथ स्थानीय बाजार में दूध की उपलब्धता और कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।