UP TET 2026: देवकली में ई-केवाईसी जांच के दौरान पकड़ा गया फर्जी 'मुन्ना भाई', मुकदमा दर्ज

UP TET 2026: देवकली में ई-केवाईसी जांच के दौरान पकड़ा गया फर्जी 'मुन्ना भाई', मुकदमा दर्ज

देवकली : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा मामला सामने आया है। देवकली स्थित हनुमान सिंह इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर शनिवार को सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान एक फर्जी परीक्षार्थी (मुन्ना भाई) को रंगे हाथों दबोचा गया। यह युवक किसी दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। बायोमेट्रिक और रेटिना स्कैन से खुला राजमिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलने वाली पहली पाली की परीक्षा के दौरान जब कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों ने 'ई-केवाईसी' (e-KYC) सत्यापन शुरू किया, तो गड़बड़ी सामने आई। परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी दीपक कुमार (पुत्र राजेंद्र प्रसाद) के स्थान पर परीक्षा दे रहे युवक का जब बायोमेट्रिक मिलान और रेटिना स्कैन किया गया, तो उसका मिलान नहीं हुआ। कड़ाई से जांच करने पर पता चला कि परीक्षा दे रहा असली युवक संजीव कुमार (पुत्र राजेंद्र प्रसाद) है। दस्तावेजों में हेरफेर प्रवेश पत्र और ई-केवाईसी विवरण का मिलान करने पर जन्मतिथि सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों में भारी अंतर पाया गया। इसके बाद परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और परीक्षा को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा - केंद्र व्यवस्थापक की तहरीर पर रामपुर मांझा थाने में आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने आरोपी के पास से आधार कार्ड, प्रवेश पत्र, ई-केवाईसी रिपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। 

लगातार दूसरे दिन पकड़ा गया फर्जी परीक्षार्थी - हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन यह दूसरा मामला सामने आया है। इससे ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार को सैदपुर के टाउन नेशनल इंटर कॉलेज में भी ई-केवाईसी जांच के दौरान एक और मुन्ना भाई पकड़ा गया था, जिसे शनिवार को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। लगातार दो दिनों में दो अलग-अलग केंद्रों पर प्रतिरूपण (दूसरे के स्थान पर परीक्षा देना) के मामले सामने आने के बाद परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों मामलों का खुलासा यह साबित करता है कि प्रशासन द्वारा लागू की गई अत्याधुनिक ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली फर्जी अभ्यर्थियों को पकड़ने में पूरी तरह प्रभावी साबित हो रही है। फिलहाल, पुलिस और परीक्षा प्राधिकरण इस पूरे रैकेट और नेटवर्क की गहन जांच में जुटे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।