संघर्ष से सफलता तक: पिता के निधन के बाद नहीं मानी हार, पहली ही परीक्षा में बने कृषि प्राविधिक सहायक

संघर्ष से सफलता तक: पिता के निधन के बाद नहीं मानी हार, पहली ही परीक्षा में बने कृषि प्राविधिक सहायक

रानू पाण्डेय की रिपोर्ट

खानपुर। कहते हैं कि कठिन परिस्थितियां इंसान की परीक्षा लेती हैं और जो उनसे लड़कर आगे बढ़ता है, वही सफलता की नई मिसाल बनता है। ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है मौधा गांव निवासी विशाल कुमार सिंह ने। पिता के असामयिक निधन के बाद आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर कृषि विभाग में कृषि प्राविधिक सहायक (AGTA) पद पर पहली ही प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल की है।विशाल ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई में पूरी की थी, लेकिन पिता स्वर्गीय संतोष कुमार सिंह के निधन के बाद परिवार के साथ पैतृक गांव लौटना पड़ा। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और सुल्तानपुर से बीएससी (कृषि) तथा एमएससी (एग्रोनॉमी) की डिग्री हासिल की।उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2024 में आवेदन करने के बाद जुलाई 2025 में आयोजित परीक्षा में शामिल हुए और घोषित परिणाम में उनका चयन हो गया। पहली ही कोशिश में मिली इस सफलता ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।माता अंजना सिंह ने कहा कि बेटे ने कठिन समय में कभी हार नहीं मानी। पति के निधन के बाद परिवार पर आई जिम्मेदारियों के बीच भी विशाल ने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और आज उसकी मेहनत का फल पूरे परिवार को मिला है।विशाल की सफलता से क्षेत्र के युवाओं में भी उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है। चाचा आनंद सिंह, समाजसेवी राजा सिंह, महेंद्र सिंह सहित अनेक लोगों ने विशाल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।