धार्मिक श्रद्धा और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ सैदपुर का ताजिया जुलूस
सैदपुर: दसवीं मोहर्रम (यौमे आशुरा) के अवसर पर नगर में पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक श्रद्धा के साथ ताजिया जुलूस निकाला गया। रोज़ादार से शुरू हुआ यह जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए देर रात इमामबाड़ा कर्बला पहुंचा, जहां परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक (ठंडा) किया गया।
हैरतअंगेज करतब और मातम
इस जुलूस में नगर के विभिन्न मोहल्लों से कुल सात बड़े-छोटे ताजिया शामिल हुए, जिन्हें आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। 'या हुसैन, या हुसैन' के नारों के बीच हजारों अकीदतमंदों ने जुलूस में हिस्सा लिया। युवाओं ने बनेठी, लकड़ी और डंडों से हैरतअंगेज करतब दिखाए। कई अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन की याद में सीनाजनी और जंजीरी मातम कर अपने गम का इजहार किया। जुलूस में बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल
रोज़ादार से निकला यह जुलूस मुख्य चौराहा, पश्चिम बाजार और रानी चौक होते हुए कर्बला पहुंचा। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी जुलूस में शामिल होकर आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। जगह-जगह शरबत, ठंडे पेय, चाय और नाश्ते के स्टॉल लगाए गए थे।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद रहा। क्षेत्राधिकारी रामकृष्ण तिवारी, कोतवाल अनिल सिंह तथा चौकी प्रभारी मनोज पांडेय पुलिस बल के साथ पूरे समय जुलूस के साथ तैनात रहे। आपात स्थिति से निपटने के लिए बिजली विभाग के कर्मचारी भी जुलूस के साथ चलते रहे। देर रात करीब 11 बजे हल्की बारिश भी हुई, लेकिन कुछ ही देर में बारिश थम जाने से कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ा। प्रशासन की निगरानी और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरा ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सकुशल संपन्न हुआ।



